शरद पूर्णिमा
चारुचंद्र की चंचल किरणें,
खेल रहीं हैं जल थल में,
स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है,
अवनि और अम्बरतल में।
पुलक प्रकट करती है धरती,
हरित तृणों की नोकों से,
मानों झूम रहे हैं तरु भी,
मन्द पवन के झोंकों से॥
—–“मैथिलीशरण गुप्त”
शरद पूर्णिमा का चाँद सबसे सुंदर होता है। और सबसे ज्यादा आशीर्वाद देता है। आशा है इस रात आप सभी पर चंद्रमा का भरपूर आशीर्वाद बरसे। जब शरद पूर्णिमा आती है। कई यादे चली आती है। एक साल पूरा परिवार जबलपुर भेड़ाघाट गए थें। तब हमने नर्मदा नदी में नौका बिहार किया था। पूरा चाँद आकाश में हो , और हम नाव में सबार चारो तरफ़ संगमरमर की नीली , गुलाबी ,सफ़ेद ,हरे marble की ऊँची -ऊँची चट्टानें और शांत पानी उस पर चाँद की अदभुत तेजोमय रोशनी। उस अदभुत छटा को शब्दों में बया नहीं किया जा सकता। जिसको याद करके शरीर आज भी रोमांचित हो जाता हैं। मैं वैसे भी हर पूर्णिमा को सुन्दरकांड पड़ती हूँ। हम सभी चाँद को जल में चावल डाल कर अर्घ देते है। “ॐ सोम सोमायः नमः ” 11 बार बोल कर हमारे घर पर शरद पूर्णिमा का उपवास रखा जाता हैं।पूरे दिन में नमक नहीं खाते मीठा कुछ भी खा सकते है। और पूजा में खोये के लड्डू बनाये जाते है। 3 पाव के 6 लड्डू उनमे से 1 स्वयं , 1 पति 1 सखी , 1 गर्भवती नारी को , 1 मंदिर , 1 बल गोपाल या ग्वाले को 1 लड्डू दिये जाते हैं ।शाम के समय तुलसी की पूजा होती हैं। लड्डू का प्रसाद का भोग लगाया जाता हैं। हवन किया जाता है ।बिष्णु-लक्ष्मी जी की पूजा का यह विशेष दिन है। आज चावल और दूध को अच्छे से गाढ़ा करके उसमे सभी Dry Fruit केसर वगैरह दाल कर खीर बनाई जाती है। और रात को चाँद की रोशनी में रखी जाती है ये मान्यता है की आज चाँद से अमृत बरसता है। जो अमृतमय हो जाता है। और दूध को जब बाहर रखा जाता हैं। तब भगवान से प्रार्थन की जाती है और ये मन्त्र 11 बार कहते है।
“चंद्र रूप भगवान तुम
अब मत शुधा दुराव
आज हमारी खीर में
अमृत रास टपकाओ”।।
और दूसरे दिन सुबह सबसे पहले खीर खाई जाती हैं। जब हम छोटे थे तब हमारे पापा सुबह 4 बजे उठा कर खीर खिलाते थे। हम भाई बहनो की नींद से आँखे भी नहीं खुलती थीं। तब भी हमें उठा कर लाया जाता था। और बाहर आँगन में बैठा कर खीर खिलाई जाती थीं। और ठंडी -ठंडी खीर खा कर हमारी आँखे खुल जाया करती थीं। पर अब जब मेरे बच्चे बड़े हो गये है ।उन्हें अपने बचपन की बातें बताया करती हूँ। अब तो सब सपना हो गया। मेरे बच्चे कभी भी सुबह 4 बजे नहीं उठे पर सुबह उठते ही सबसे पहले मै उनको खीर पीने के लिए देती हूँ ।जिसे वो बहुत शौक से पीते हैं और कहते मम्मी इसका स्वाद अदभुत हैं। और सचमुच जैसे खीर अमृत तुल्य हो गई हो।
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