साल का पवित्र महीना शुरू होने जा रहा हैं । 1 अक्टूबर को नवमी है। इस दिन कन्या भोजन करा कर दुर्गानवमी की समाप्ति हुई। 2 अक्टूबर को दशहरा है। इस दिन हमारे यहाँ अपने वाहन को साफ़ धोया जाता है और शाम को अपनी सभी गाड़ियों की पूजा की जाती है। बकायदा एक देवता की तरह इसे हमारी शक्ति के रूप में पूजा जाता है | इसके बाद 5 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा आई जिसमें हमारे यंहा तुलसी की पूजा होती है और 7 लड्डू बनाये जाते है। जिसमें 1 पति , 1 मंदिर, 1 ग्वाले का , 1 सखी , 1 गर्भवती नारी का, एक खुद का, 1 बच्चों का । इस प्रकार शाम पूजा के बाद सभी को प्रसाद दिया जाता है। आज दिन भर उपवास रखकर फलाहार करते हैं। नमक नहीं लेते। रात को हम दूध में खोया डालकर गाढ़ा करके बाहर चाँद की रोशनी में रखते हैं। ऐसा मानते हैं कि आज रात को चाँद से अमृत बरसता हैं ।ये अच्छा है यहाँ बिल्ली का डर नहीं है अतः, दूध को बाहर रख देते है। और चाँद को देखकर उनसे प्रार्थना करते हुए इस मंत्र को बोलते है। चंद्र रूप भगवान तुम अब मत सुधा दुराव । आज हमारी खीर में अमृत रस टपकाओं ।।
फिर 10 अक्टूबर को करवाचौथ का त्यौहार आया यह भी बड़ा प्यारा दिन होता है। इस बार समय पर चाँद निकल आया ।अरु के साथ मोहनी ष ने भी उपवास रखा है। शाम को दोनों ने चाँद को अर्ध्य देकर पूजन किया और अपना व्रत तोड़ा | इसके बाद दीपावली का 5 दिनों का त्यौहार शुरू हुआ | 19 अक्टूबर को पहला दिन धनतेरस का इस दिन धन्वंतरी की पूजा होती है। इसबार घर में बहुत सा नया सामान आया शाम को भगवान धनवंतरी की पूजा की साथ ही यम की पूजा भी होती है यम के लिए एक दिया कोड़ी डाल कर बाहर दरवाजे पर रखा जाता है और यह मंत्र बोल कर प्रार्थना की जाती हैं। “देवता यम वंदना सूर्य पुत्र यमराज मृत्यु पास धारी, काल और अपनी पत्नी सहित त्रयोदशी में दिए इस दीप दान से प्रसन्न हो ” | 20 अक्टूबर को ” नरक चौदस ” है। यह दिन हनुमान जी का भी है। शाम को पूजा में 4 लड्डू बेसन के चढ़ाएँ जाते है। सुबह यम के 14 नाम 3 बार पढ़ कर भीष्म पिता को 3 अन्जुली तिलांजली देते हैं। 1 ओम् यमाय नमः 2 ओम् धर्म राजाय नमः 3 ओम् मृत्यवे नमः 4 ओम् अन्तकाय नमः 5 ओम् वैवस्वताय नमः 6 ओम् कालाय नमः 7 ओम् सर्व-भूत छयाय नमः 8 ओम् औदुम्वराय नमः 9 ओम् दहनाय नमः 10 ओम् नीलाय नमः 11 ओम् परमेष्टिने नम, 12 ओम् वृको दराय नमः 13 ओम् चित्राय नमः 14 ओम् चित्र-गुप्ताय नमः
20 अक्टूबर तीसरा दिन बड़ी दीपावली है। यह दिन बड़ी व्यस्तता वाला होता है। सुबह से ही घर की सजावट, सफाई आदि होती हैं दोपहर से ही पूजा की ढेर सारी तैयारियाँ।पूजा-पाठ का सभी सामान लगाना, रंगोली बनाना समय पर सारी तैयारी करनी है। क्योंकि इसबार पूजा का पहला मुहूर्त शाम 6 बजे से 8 बजे तक है। हमारी पूजा , हवन आदि बड़े सुंदर ढंग से संपन्न हुई । पूरे घर,मंदिर में पूजन के बाद गाड़ी का पूजन किया,फिर प्रसाद लेकर इस पूजा को पूरा किया ।इसके बाद पड़ोसी आते रहे । 11:30 बजे ” माँ लक्ष्मी ” की साधना करके माँ की उपस्थति को अपने घर में स्थापित करके सो गये | चौथा दिन गोर्वधन पूजा का है ” गोर्वधन ” मंदिर के प्रागढ़ में बनाये जाते हैं, जहाँ भजन, पूजन होता है।
22 अक्टूबर पांचवा दिन भाई-दूज का है। डोना ने भाई के लिए Gift Hamper भेजा है। इस प्रकार यह 5 दिन का त्यौहार आज पूरा हो गया है। इस त्यौहार की चहल पहल 10-12 दिन लगी रहती है। मिठाई और उपहार का लेन -देन चलता रहता है। यह महीना बड़ा सुंदर रहा है। जैसे घर में खुशियों और माँ के आशीर्वाद की बाढ़ सी आ गई हो इस महिने का बहुत-बहुत शुकराना।