May 5, 2026

मेरा 65वाँ जन्मदिन

जीवन एक बहती धारा है।

और इस धार में समय बहता जा रहा है। साल, दिन, महिने सब कुछ निकलता जा रहा है और इसी तरह 2025 बीत गया और इंग्लिश वर्ष के नये साल का आगमन हो गया | अब देखना है हम इस साल क्या नया करते हैं। या हमारे जीवन में क्या-क्या घटित होता है ये सभी कुछ इसके गर्भ में छिपा है। चलो ये तो हुई आगे की बातें, आज को सेलिब्रेट करते हैं।

इस बार 28 जनवरी को डोना आ रही है मेरे जन्मदिन पर, पिछले 2-3 साल से हमारे साथ नही थी उसके आने पर हमारा परिवार पूरा हो जाता है

इस बार बहुत ठंड है। जो मौसम के अनुसार कुछ ज्यादा है।

26 जनवरी को पार्क में गणतंत्र दिवस कार्यक्रम था | इस बार भी बहुत सुंदर ढंग से बच्चों द्वारा मनाया गया | अगले साल से दिगन्तरा भी मनायेगी वह बहुत शौकीन हैं।

सजने संवरने का बड़ा शौक है बहुत नटखट होती जा रही है। बहुत समझदार और किसको कब खुश रखना है किसको प्यार करना है। बहुत अच्छे से समझ आता है। पता नहीं कहा से ये सब अक्कल आती है हम सभी बड़े आशचर्य से उसे देखते रह जाते हैं।

जब रो रही हो, कहना नही मानती तब मैं उससे गुस्सा हूँ तब यदि उसने देखा की दादी नाराज हैं तो बड़े प्यार से बोलेगी “जी दादी” अब आपका कहना मानूंगी ‘आप प्यारी हो’ तब उसका भोला सा चेहरा देख कर गले लगा लेती हूँ

उससे पूरे घर में चहल पहल पूरा घर बिखरा रहता है। आपने जमाया नहीं और पीछे से उसने फिर से बिखेरना चालू कर दिया |

बहुत दिन से रोज़ बोलती है ‘बुआ आ रही है’ दादी का Happy-Birthday है | मैं केक कटूँगी घर में Balloon लगाऊँगी |

और उसकी बुआ 28 तारीख़ को सुबह आ गई अब बहुत अच्छा लग रहा है। दिगंतरा के तो मजे आ गये अपना ढेर सा सामान देखकर इस बार डोना साइकिल लाई है | दिगंतरा को हर स्टेज पर क्या जरूरत है। सोचने के पहले आ गया है। दिगन्तरा को पैदा होते से ये सौभाग्य मिला है उसकी लाई हर चीज बेमिसाल है बड़े सोच समझ कर चुनचुन कर समान लाती हैं।

30 जनवरी को मेरा 65 वां जन्मदिन हैं। आज सभी बच्चे मेरे पास है। सालो को देखती हूँ तो लगता है की इन 65 सालों में क्या-क्या गुजर गया पूरा जीवन एक रील की तरह सामने आ जाता है।

किन-किन परिस्थितियों से निकल कर अपने बच्चों के लिए इस समय खड़ी हूँ

राम के जाने के बाद जीने की चाह खत्म हो गई थी | लगा मुशकिल है ज्यादा जी पाऊँगी बस मेरा ये कहना था की बस मुझे मरना है पर ये संभव नहीं हो पाया |

और जब बच्चों का सोचा तो इस जीवन को जीने के रास्ते निकल पड़ी और लो आज इस समय यहाँ खड़ी हूँ।

अपने बच्चों को इतना बड़े होते और अब तो एक नन्ही सी पोती है। डोना – विद्या भूषण के आने पर खुशियाँ कई गुना बढ़ गई। दोनों सभी के किए बहुत सा सामान लाये है और मेरे लिए तो बहुत ही Beatiful Eartops लाई है मोती और डायमंड के | शाम को बुलबुल भी आ गयी वह भी बहुत सारा सामान लायी थी | आज सुबह से ही खाना पीना चल रहा है। शाम को केक कटा बड़े मजे से celebration हुआ खूब डांस हुआ।

फिर मंदिर गये। उसकी असीम कृपा को धन्यवाद दिया जिसने आज फिर एक खूबसूरत दिन हम सबको साथ मनाने का मौका दिया ।

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