JULY 2024
July में मैं और डोना London से Delhi आयें 6 तारीख से 8 तक London घूमें 10 को वापिस आ गये। April से July तक का time पता ही नहीं चला बहुत ही खूबसूरत और Adventure से भरा हुआ था ।

जब दिल्ली आयें तब यहा की गर्मी का क्या कहना ! लगा की जैसे किसी ने जलती भट्ठी में डाल दिया हो। इतने महीने बिल्कुल ठंडे मौसम में रहे वहां तो लग रहा था की कब cotton cloth पहनूँगी ? कितना बड़ा अंतर हैं। घर पर भी सब कुछ नया-नया लग रहा था। दिगन्तरा बड़ी हो गई अपने बच्चो को बहुत समय बाद देख रही थी, जिनके बिना रहने की आदत नहीं । Dona के पास इतने समय रही उसने बहुत प्यार और बड़ी care से रखा था।

लगता था की जैसे मैं एक छोटी बच्ची हूँ, मैंने कभी कल्पना नहीं की थी -एक तो वह इतनी दूर रहेंगी और मैं उसके पास इतना रहूंगी ।यहां की गर्मी देखकर हमने श्रीनगर जाने का plan बनाया 20 तारीख को हम निकल पड़े हम बड़े खुश थें की चलो 6-7 दिन तो इस गर्मी से निजात मिलेगी।

पर ये क्या खोदा पहाड़ निकली चुहिया ” यहाँ तो 33० c तापमान था। Airport से निकलना भी मुश्किल हो रहा था लगभग पूरे देश का हाल एक जैसा हैं पर यहां पर इसकी कल्पना नहीं की थी ?पर चलो भारत के स्वर्ग में तो आ गयें थे ।हम Taj में रुके ।

वाह डल-झील ” के किनारे ऊँचे पहाड़ पर एक तरफ झील दूसरी तरफ ऊँचे पहाड़ बहुत ही सुन्दर जगह ! दिन में कशमीरी Lunch लिया यह बड़ा लाजवाब था।

दूसरे दिन बढ़िया कश्मीरी breakfast , लेकर घूमने निकल पड़े निशांत बाग़ ,शलिमार बाग़ , परी महल देखा सभी बहुत सुन्दर हैं , बस कमी थी साफ़ – सुथरे पन की, और सभी जगह water fountain सूखे और गंदे थे ” इन सबको देखकर बड़ा दुख हुआ, की हमने कभी movie में इन्ही garden’s को बहुत सुन्दर देखा है पर यहां सभी उल्टा है फिर दूसरे दिन सोनमर्ग गये। यहां तो पहाड़ो की सुंदरता देखते ही बनती थी।

ऊँचे पहाड़ो पर जमी बर्फ उसका पिघलकर नीचे आना ऐसा लग रहा था कि जैसे प्रकृति अपने सारे रहस्य खोल रही है बहुत सुंदर!! तीसरे दिन हम गुलमर्ग गयें यहां पूरी वादियां सफ़ेद फूलो से भरी हुई थी यहां के नजारों का क्या कहना सही में लोगों ने गलत नहीं कहा कि कहीं स्वर्ग है तो यहीं है। यहां हम KOLAHOI GREEN HEIGHTS में रुके, Pure Kashmiri Style , पूरा होटल लकड़ी का बना हुआ अंदर कश्मीरी गलीचे, लकड़ी पर की गई नक्काशी, छोटी – छोटी खिड़कियाँ बिल्कुल नीची छत , अलग ही अनुभव था। शाम को आस -पास घूमें। दूसरे दिन सुबह बहुत अच्छा Breakfast किया , फिर 9 बजे हम Apharwat Peak देखने गये जो दो Zone में बटा हुआ है।

जिसकी ऊंचाई 14 हजार feat है। Higher peak पर बर्फ जमी हुई थी उस पर लोग खेल रहें थे। इतनी ऊंचाई पर आकर चारो तरफ पहाड़ो की ख़ूबसूरती देखते ही बनती थी कुछ भी कहो जब बर्फ गिरती होगी और पूरे पहाड़ बर्फ से ढंके होते होंगे। इसकी कल्पना ही रोमांच से भर देती है। यही पर winter-game होते है। 4 घंटे में हम घूमकर वापिस आ गए ।फिर दिनभर पूरा गुलमर्ग घूमा इस बीच बारिश होने से और सुंदर समा बंध गया 🙌 और दिनों में हमने यूनूस मार्ग, दूध-पत्री देखा ।घोड़े पर सवारी की बहुत ही मजा आया ऊँचे – नीचे रास्तो जंगलो से होते हुए सफर किया अलग ही जीवन का अनुभव था।

इस समय अमरनाथ यात्रा चल रही थी तो उसकी भी भीड़-भाड़ सभी जगह बहुत थी ।भारी मात्रा में पुलिस फोर्स लगी थी ।सभी जगह सुन्दर है डल-झील में Boating की -शाम का समय, अस्त होता हुआ सूरज, शिकारे में आराम से लेटे हुए सुकून से पानी, आस-पास की सुंदरता निहारते हुए क्या कहना इस Boating का।

ढेर सारे Dry fruits, shawl, Saree, Jacket,और भी बहुत सारे कशमीरी सामान लिया | इन सबके बीच गर्मी बहुत अखर रही थी | डोना और मुझे तो Face पर Sun burn हो गया था हाथो में लाल चक्कते पड़ गये थे | पर चलो कशमीर के घूमने का ये भी अनुभव हुआ कि स्वर्ग में भी मौसम ख़राब हो सकता है | अरे हां हमने बहुत बड़े-बड़े Apple garden देखे जो सेबो से लदे हुए थे | बादाम के पेड़ भी देखे कुछ तो फूल मैं पहली बार देख रही थी | अच्छी-अच्छी जगह कशमीरी खाना भी खाया ।

बहुत अच्छा अनुभव था। 7 – 8 दिन में हम वापिस घर आ गए | 29 July को मोहनीष को You Tube की तरफ से Eremedium के 100, 000 subscribers होने पर Silver – button दिया गया | ये भी एक बड़ी उपलब्धि थी | इसके लिए सभी का धन्यवाद।

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