4 फरवरी को मोहनीष और अरुणिमा को देहरादून शादी में जाना है। अरुणिमा के चाचा के लड़के की शादी है। 2 तारीख़ को हल्दी आदि का कार्यक्रम है। अभी सभी व्यस्त हैं।
4 तारीख को मैं और डोना सूरजकुंड का मेला देखने गये। 7 साल पहले मैं और डोना और मेरी 2 फ्रेंड्स साथ गये थे। वहाँ जाकर पुरानी यादें फिर ताज़ा हो गई। बहुत ही सुंदर सजावट अलग-अलग जगह के डांस, बहुत मज़ा आया। वहीं पहले जैसी भीड़भाड़, सजावट के सामान, कपड़े , ज्वेलरी आदि की ढेरो दुकाने थीं। अलग -अलग स्टेट का खाना। हमने भी बहुत अच्छी-अच्छी चीज़ें ख़रीदी | 5-6 घंटे बहुत घूमें , शाम 5 बजे के बाद घर आये।
आज सुबह ही मोहनीष , अरुणिमा देहरादून गये हैं। 6 तारीख को आ जायेंगे। 7 तारीख शाम को Reception है ग्रेटर नोएडा में। अतः शाम को वहाँ गये बहुत लोगों से मिलना हुआ।
अभी 2-3 दिन बहुत व्यस्त रहें। बड़े मजे कर रहे थे | दिगन्तरा के साथ तो और मज़े थे। डोना को तो दिन में बिल्कुल लेटने नहीं देती थी। दिन भर उसके साथ खेलो।
13 फरवरी को हम लोग अपने घर सागर गये। मेरे मझले मामा 27 जनवरी को नहीं रहे थे | मैं उस समय जा नहीं पायी | डोना चार साल से नानी के पास नहीं जा पाई | उसे भी नानी से मिलना था। अतः हमने 11 दिन का प्रोग्राम बनाया कीसबसे मिलना हो जायेगा ।
हम 15 तारीख़ को रहली गये। उस दिन महाशिवरात्रि थी । 2022 को महाशिवरात्रि के दिन भी हम सागर आये हुए थे |
आज का दिन बड़ी पूजा-पाठ का होता है। भाई ने घर पर रुद्राभिषेक के लिए पंडित जी को बुलाया हैं । उन्हें आने में देर हो रही थी। अतः हम रहली चले गए मामा के घर दिन भर उनकी याद करके बीता । हम सभी भाई-बहनों का मामा-मामी से गहरा लगाव रहा है।
अतः उनका असमय जाना परिवार, समाज की गहरी क्षति थी।
हमारे मझले मामा ने पूरे घर, समाज को एक गहरा सम्बल दिया था। गायत्री समाज के विशेष कार्यकर्ता थे | बड़े-बड़े गायत्री अनुष्ठान करवाना | गायत्री मंदिर के काम भी संभाले हुए थे | मेरे दोनों बच्चो की शादियाँ भी उनके देख रेख में वैदिक रीतियों से हुई | उन्होंने हरिद्वार से पंडित बुलवाये थे।
इन सभी बड़े कामों को उन्होंने अपनी ज़िम्मेदारी से बड़े अच्छे से निभाया था।
उनके दिलासा वाले शब्द मुझे हमेशा याद रहेंगे — “तुम चिंता मत करना, मैं घर से पूजा-पाठ, शादी के सभी सामान ले आऊँगा।”
यहाँ तक वरमाला तक अपने बगीचे के खूबसूरत, ताजे फूलों से बनवाकर लाये थे।और भी ढेरों अनुभव जो उनके साथ बितायें याद आते हैं। कैसे हम धीरे-धीरे सबसे जुदा होते जाते हैं।
वहाँ से आने के बाद हम अगले दिन Pench Tiger Reserve गये।
यहाँ घने Teak Forests और Pench River है। यह Madhya Pradesh एवं Maharashtra की Border पर है।
यहीं “मोगली” मिला था। जिसकी Real-Life से Inspiration लेकर Rudyard Kipling ने Jungle Book लिखी थी।
हमने यहाँ दो दिन सफारी की पर Tigers के दर्शन नहीं हुए थे। हाँ जंगल में और सारे जानवर, पक्षी अवश्य देखे ।
खैर जंगल तो अपने आप में खूबसूरत होते हैं। घने पेड़, नदी और एकदम खामोश खुशनुमा माहौल। मजा बहुत आता है | हमें जंगल, पहाड़ शुरू से ही अच्छे लगते हैं। यहाँ शहरों की भागदौड़ जैसे थम जाती है। ना कोई भागमभाग, ना नेटवर्क, अच्छा मन पसंद खाना खाओ और मजे करो |
एक दिन सुबह ही पैदल जंगल घूमने गए। पैदल चलने पर हमें नए-नए पेड़ों के बारे में जानकारी मिली ।
इस बार हमने मकड़ी का जाल बनाने का नया रूप देखा। जो जमीन के अंदर Tunnel के आकार का जाल बनाती है। जो जानवरी से मार्च तक होता है। इसे Funnel Spider भी बोलते हैं।
इस तरह घूम कर वापस मम्मी के पास आये।
फिर नोएडा। इस बार डोना भी हम लोगों के साथ थी। मम्मी के पास ,मेरी नानी के घर और भी बहुत जगह घूमे।